Sunday, July 5, 2009

तितली

दूर देश से आई तितली,
चंचल पंख हिलाती।
फूल-फूल पर, कली-कली पर,
इतराती, इठलाती।

कितने सुंदर हैं पर इसके,
जगमग रंग-रँगीले।
लाल, हरे, बैंजनी, वसन्ती,
काले, नीले, पीले।

बच्चों ने जब देखी इसकी,
खुशियाँ, खेल निराले।
छोड़छाड़ कर खेल-खिलौने,
दौड़ पड़े मतवाले।

अब पकड़ी तब पकड़ी तितली,
कभी पास है आती।
और कभी पर तेज़ हिलाकर,
दूर बहुत उड़ जाती।

बच्चों के भी पर होते तो,
साथ-साथ उड़ जाते।
और हवा में उड़ते-उड़ते,
दूर देश हो आते।

No comments:

Post a Comment