दूर देश से आई तितली,
चंचल पंख हिलाती।
फूल-फूल पर, कली-कली पर,
इतराती, इठलाती।
कितने सुंदर हैं पर इसके,
जगमग रंग-रँगीले।
लाल, हरे, बैंजनी, वसन्ती,
काले, नीले, पीले।
बच्चों ने जब देखी इसकी,
खुशियाँ, खेल निराले।
छोड़छाड़ कर खेल-खिलौने,
दौड़ पड़े मतवाले।
अब पकड़ी तब पकड़ी तितली,
कभी पास है आती।
और कभी पर तेज़ हिलाकर,
दूर बहुत उड़ जाती।
बच्चों के भी पर होते तो,
साथ-साथ उड़ जाते।
और हवा में उड़ते-उड़ते,
दूर देश हो आते।
Sunday, July 5, 2009
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