यह लघु सरिता का बहता जल,
कितना शीतल, कितना निर्मल।
हिमगिरि के हिम से निकल-निकल,
यह विमल दूध-सा हिम का जल,
कर-कर निनाद कलकल छलछल,
बहता आता नीचे पल-पल।
तन का चंचल, मन का विह्वल।
यह लघु सरिता का बहता जल।
निर्मल जल का यह तेज़ धार,
करके कितनी शृंखला पार,
बहती रहती है लगातार,
गिरती-उठती है बार-बार।
रखता है तन में इतना बल।
यह लघु सरिता का बहता जल।
एकांत प्रांत निर्जन-निर्जन,
यह वसुधा के हिमगिरि का वन,
रहता मंजुल मुखरित क्षण-क्षण,
लगता जैसे नंदन-कानन।
करता है जंगल में मंगल।
यह लघु सरिता का बहता जल।
करके तरु-मूलों का सिंचन,
लघु जल-धारों से आलिंगन,
जल-कुंडों में करके नर्तन,
करके अपना बहु परिवर्तन।
आगे बढ़ता जाता केवल।
यह लघु सरिता का बहता जल।
ऊँचे शिखरों से उतर-उतर,
गिर-गिर गिरि के चट्टानों पर,
कंकड़-कंकड़ पैदल चलकर,
दिनभर, रजनीभर, जीवनभर।
धोता वसुधा का अंतस्तल।
यह लघु सरिता का बहता जल।
मिलता है इसको जब पथ पर,
पथ रोके खड़ा कठिन पत्थर,
आकुल, आतुर, दु:ख से कातर,
सिर पटक-पटककर रो-रोकर।
करता है कितना कोलाहल।
यह लघु सरिता का बहता जल।
हिम के पत्थर वे पिघल-पिघल,
बन गए धरा का घारि विमल,
सुख पाता जिससे पथिक विकल,
पी-पीकर अंजलिभर मृदु जल।
नित जलकर भी कितना शीतल।
यह लघु सरिता का बहता जल।
कितना कोमल, कितना वत्सल,
रे, जननी का वह अंतस्तल!
जिसका यह शीतल करुणाजल,
बहता रहता युग-युग अविरल।
गंगा, यमुना, सरयू निर्मल।
यह लघु सरिता का बहता जल।
Friday, July 3, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
आप ने बचपन में पहुँचा दिया। आज पढ़ रहा हूँ तो लग रहा है कि तत्सम शब्द प्रधान रचना भी कितनी सुग्राह्य हो सकती है।
ReplyDeleteआप को साधुवाद और नेपाली जी को श्रद्धांजलि।
narayan narayan
ReplyDeleteअच्छा है अंदाज़े-बयाँ।
ReplyDeleteसुस्वागतम्।
Bahut sundar rachana..really its awesome...
ReplyDeleteRegards..
DevSangeet
बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ReplyDeletekitne purane balmitra se ab jake mulakat huee.batlahi nahi sakte madhosh hhi hum kitne. Chandu sane.
ReplyDeleteI read this poem in school and loved it. But I somehow lost my poetry book and have been looking for this poem ever since. Thanks so much for posting this. Gopalji creates music with his words!! Simply outstanding!
ReplyDeleteFolks:
ReplyDeleteYou are all very welcome. Glad to contribute my mite to this audience. I will try to get more ...
- Porcupyn