Saturday, May 16, 2009

कदम बढ़ेंगे ...

कदम बढ़ेंगे नहीं रुकेंगे
दुश्मन ने ललकारा है, दुश्मन ने ललकारा है
हमको अपनी धरती प्यारी,
भारत देश हमारा है, हमारा है, हमारा है

१) देश भक्ति के दीप सिखा के हम दीवाने परवाने
बलिपथ के मतवाले राही चलते हैं सीना ताने
तन देंगे धन देंगे इसपर प्राण न्योछावर कर देंगे
काली रण चण्डी का आँगन झरी मुण्ड से भर देंगे
तन की हर हड़्डी चमकेगी मानो तेज दुधारा है
हमको अपनी धरती …

२) जगो देश की प्यारी बहनों जगो देश की माताओं
वीर पत्नियों उठो कि रण के सब सामान सजा लाओ
बहा हमारा अगर पसीना शस्त्रों की तैय्यारी है
एक खून की बूंद हमारी सौ दुश्मन पर भारी है
वीर सैनिकों उठो कि तुमको माँ ने आज पुकारा है
हमको अपनी धरती …

३) वह कैसे सोएगा सुख से जिसका दुश्मन जीता है
“जागो उठो शत्रु को मारो” गाती अपनी गीता है
साँसों में तूफ़ान बसा है बोली में पलती आँधी
हमने तो अपने पैरों में महा प्रलय की गती बाँधी
मरो देश के लिये सपूनों यही हमार नारा है
हमको अपनी धरती …

No comments:

Post a Comment